FD कैलकुलेटर: फ़िक्स्ड डिपॉज़िट मैच्योरिटी, मासिक और तिमाही ब्याज
जमा राशि, बैंक की दर और अवधि (साल और महीने) डालें। मैच्योरिटी पर एक साथ या हर महीने/तिमाही ब्याज चुनें।
- आपकी भरी जानकारी कहीं सेव नहीं होती
- मुफ़्त
- साइन-अप की ज़रूरत नहीं
मैच्योरिटी राशि
₹1,21,341
- कुल ब्याज
- ₹21,341
- शब्दों में
- 1.21 लाख
- असल सालाना रिटर्न
- 6.66%
ज़्यादातर बैंकों की तरह ब्याज हर तिमाही जुड़ता है। सालाना सीमा से ज़्यादा ब्याज पर TDS कटता है।
साल-दर-साल
| साल | उस साल का ब्याज | बैलेंस |
|---|---|---|
| 1 | ₹6,660 | ₹1,06,660 |
| 2 | ₹7,104 | ₹1,13,764 |
| 3 | ₹7,577 | ₹1,21,341 |
कैसे इस्तेमाल करें
- जमा राशि और बैंक की ब्याज दर डालें।
- अवधि साल और महीनों में डालें।
- ब्याज कैसे चाहिए चुनें: मैच्योरिटी पर, हर तिमाही या हर महीने।
ज़रूरी जानकारी
भारतीय बैंक क्यूम्युलेटिव FD में हर तिमाही ब्याज जोड़ते हैं: मैच्योरिटी = P × (1 + r/4)^(तिमाहियाँ)। आख़िर में अधूरी तिमाही पर साधारण ब्याज और 6 महीने से कम की FD पर साधारण ब्याज मिलता है। इसीलिए 3 साल की 6.5% FD का असल रिटर्न लगभग 6.66% सालाना है।
तिमाही ब्याज में हर तिमाही P × दर ÷ 4 मिलता है। मासिक ब्याज में बैंक थोड़ी कम (डिस्काउंटेड) राशि देते हैं, P × (r/12) ÷ (1 + r/12), क्योंकि यह तिमाही ख़त्म होने से पहले मिलता है।
FD का ब्याज आपकी स्लैब दर पर पूरी तरह टैक्सेबल है, और सालाना सीमा पार होने पर बैंक TDS काटते हैं, जब तक पात्र होकर फ़ॉर्म 15G/15H न दें। वरिष्ठ नागरिकों को आमतौर पर 0.25%–0.75% ज़्यादा मिलता है। DICGC हर बैंक में ₹5 लाख तक जमा का बीमा करता है।
सवाल-जवाब
FD का ब्याज कैसे निकलता है?
क्यूम्युलेटिव FD में ब्याज हर तिमाही जुड़ता है: A = P × (1 + r/400)^(4 × साल)।
मासिक ब्याज सालाना ब्याज के 12वें हिस्से से कम क्यों है?
तिमाही से पहले देने के कारण बैंक इसे डिस्काउंट करते हैं। ₹10 लाख पर 6% से ₹5,000 की जगह लगभग ₹4,975 मिलते हैं।
क्या FD का ब्याज टैक्सेबल है?
हाँ, स्लैब दर पर आय के रूप में, क्यूम्युलेटिव FD में भी जहाँ ब्याज मैच्योरिटी पर मिलता है।
FD समय से पहले तोड़ने पर क्या होता है?
बैंक आमतौर पर असल अवधि की दर में से लगभग 0.5%–1% पेनल्टी घटाकर ब्याज देते हैं।
क्या FD में पैसा सुरक्षित है?
DICGC हर बैंक में हर जमाकर्ता के ₹5 लाख तक (ब्याज सहित) का बीमा करता है।