लोन तुलना कैलकुलेटर: दो लोन ऑफ़र आमने-सामने
दोनों ऑफ़र की राशि, दर, अवधि और प्रोसेसिंग फ़ीस डालें। दोनों की EMI और पूरी अवधि में कौन-सा लोन कितना सस्ता है, दिख जाएगा।
- आपकी भरी जानकारी कहीं सेव नहीं होती
- मुफ़्त
- साइन-अप की ज़रूरत नहीं
लोन A इतना सस्ता है
₹66,260
लोन A- EMI – लोन A
- ₹17,356
- EMI – लोन B
- ₹17,674
- ब्याज – लोन A
- ₹21,65,552
- ब्याज – लोन B
- ₹22,41,811
- ब्याज + फ़ीस – A
- ₹21,75,552
- ब्याज + फ़ीस – B
- ₹22,41,811
पूरी अवधि का ब्याज और प्रोसेसिंग फ़ीस जोड़कर तुलना। राशि अलग हो तो EMI भी देखें।
कैसे इस्तेमाल करें
- पहला ऑफ़र लोन A में डालें: राशि, दर, अवधि और फ़ीस।
- दूसरा ऑफ़र लोन B में डालें।
- देखें कि ब्याज + फ़ीस में कौन-सा लोन सस्ता है और EMI की तुलना करें।
ज़रूरी जानकारी
कम दर का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं। ज़्यादा प्रोसेसिंग फ़ीस या लंबी अवधि छोटी दर-कटौती का फ़ायदा ख़त्म कर सकती है। पूरी अवधि का ब्याज और फ़ीस जोड़कर ही असली अंतर दिखता है।
होम लोन दूसरे बैंक में ले जाते समय (बैलेंस ट्रांसफ़र) दोनों तरफ़ मौजूदा बकाया और बाकी साल डालें, A में अभी की दर और B में नए बैंक की दर और फ़ीस। अगर बचत बहुत सालों बाद ही हो तो कागज़ी काम शायद फ़ायदेमंद नहीं।
फ़्लोटिंग दरें लोन के दौरान बदल सकती हैं, इसलिए तुलना तभी तक सही है जब तक दोनों दरें वही रहें। रेपो रेट के ऊपर का स्प्रेड देखें, क्योंकि वह हिस्सा आमतौर पर तय रहता है।
सवाल-जवाब
दर ज़्यादा मायने रखती है या फ़ीस?
लंबे लोन में दर सबसे अहम है। 1–3 साल के छोटे लोन में ज़्यादा प्रोसेसिंग फ़ीस छोटे दर-अंतर से भारी पड़ सकती है।
क्या अलग-अलग अवधि की तुलना कर सकते हैं?
हाँ। लंबे लोन में EMI कम दिखेगी पर कुल ब्याज आमतौर पर काफ़ी ज़्यादा होगा।
क्या बैलेंस ट्रांसफ़र फ़ायदेमंद है?
आमतौर पर तब, जब दर में कम से कम 0.25%–0.5% का अंतर हो और कई साल बाकी हों। फ़ीस में लीगल और वैल्यूएशन चार्ज भी जोड़ें।
क्या फ़ीस पर GST शामिल है?
नहीं। GST जोड़ना हो तो फ़ीस प्रतिशत में लगभग 18% और जोड़ें।
क्या मेरा डेटा सेव होता है?
नहीं। सब आपके ब्राउज़र में चलता है।